खामोशी

खामोशी

खामोशी 

खामोशी ये जो तुम्हारी है
दिल की कह रही कहानी है ।

पलकों के गिरने की जो आहट है
जैसे चुप बैठी कोई दीवानी है ।

संभलो नहीं जरा भी मेरी बातों से
लगती अच्छी तेरी ये नादानी है ।

बिखेरो न होठों के पंखुड़ी को
अभी तो पी है बेखुदी अभी बाकी है ।

पूछो न तमन्ना दिल की मुझसे
मुख़्तसर सी जिंदगी साथ निभानी है ।

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