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इस दीपावली अपने घर के साथ किसी गरीब के घर में भी खुशियों का दीप जलाएँ

इस दीपावली अपने घर के साथ किसी गरीब के घर में भी खुशियों का दीप जलाएँ

दीपावली 2026: मिट्टी के दीये, जरूरतमंदों की मदद, स्वच्छता, सादगी और अपनों के साथ खुशियों का त्योहार

आज धनतेरस है। बाजारों में रौनक है, दुकानों पर भीड़ है और घरों में दीपावली की तैयारियाँ चल रही हैं। कोई नए बर्तन खरीद रहा है, कोई सोने-चाँदी की खरीदारी कर रहा है, तो कोई अपने घर को सजाने के लिए रंग-बिरंगी लाइटें और सजावटी सामान खरीद रहा है। चारों तरफ उत्साह और खुशियों का माहौल है।

लेकिन इस रौनक के बीच एक बार उन चेहरों को भी देखिए, जो हमारी तरह ही दीपावली का इंतजार कर रहे हैं।

सड़क किनारे मिट्टी के दीये बेचता एक कुम्हार, छोटी-सी दुकान पर सजावटी सामान लगाए बैठा कोई गरीब दुकानदार या अपने हाथों से खिलौने और पूजा का सामान बनाकर बेचने वाला कोई कारीगर। इन सभी की भी अपनी उम्मीदें हैं। वे भी चाहते हैं कि दीपावली पर उनके घर में खुशियाँ आएँ, उनके बच्चे नए कपड़े पहनें और उनका परिवार भी त्योहार का आनंद ले सके।

हमारे लिए बाजार से कुछ दीये खरीदना शायद बहुत छोटी बात हो, लेकिन किसी कुम्हार के लिए वही उसकी मेहनत की कमाई और उसके परिवार की खुशियों का सहारा बन सकती है।

तो क्यों न इस बार दीपावली कुछ अलग तरीके से मनाई जाए? क्यों न हम अपने घर को रोशन करने के साथ-साथ किसी दूसरे के घर में भी खुशियों का दीप जलाने का प्रयास करें?

मिट्टी के दीये खरीदें, किसी की मेहनत को सम्मान दें

आजकल बाजार में सजावट के लिए तरह-तरह की आधुनिक लाइटें उपलब्ध हैं। घर को सुंदर बनाने के लिए इनका इस्तेमाल करना गलत नहीं है, लेकिन क्या हम अपनी खरीदारी में मिट्टी के दीये बनाने वाले कुम्हारों और स्थानीय कारीगरों को भी जगह दे सकते हैं?

एक कुम्हार कई दिनों की मेहनत से मिट्टी के दीये तैयार करता है। मिट्टी जुटाने से लेकर उन्हें आकार देने, सुखाने और पकाने तक में उसका समय और मेहनत लगती है। त्योहार के दिनों में वह उम्मीद करता है कि उसके बनाए दीये बिकेंगे और वह भी अपने परिवार के लिए कुछ अच्छा कर पाएगा।

इसलिए इस बार बाजार जाएँ तो मिट्टी के दीये जरूर खरीदें। अपने मोहल्ले के छोटे दुकानदारों, स्थानीय कारीगरों और जरूरतमंद लोगों से भी सामान खरीदने की कोशिश करें।

हम किसी बड़े शोरूम से हजारों रुपये की खरीदारी कर सकते हैं, तो किसी छोटे दुकानदार से कुछ सामान खरीदने में भी संकोच नहीं करना चाहिए।

याद रखिए, किसी गरीब की मेहनत से खरीदा गया एक छोटा-सा दीया भी हमारे त्योहार को बहुत बड़ा बना सकता है।

त्योहार मनाएँ, लेकिन दिखावे की दौड़ में शामिल न हों

दीपावली खुशियों का त्योहार है, लेकिन धीरे-धीरे त्योहारों में दिखावे की प्रवृत्ति भी बढ़ती जा रही है।

किसने कितना महंगा सामान खरीदा? किसके घर में कितनी महंगी सजावट हुई? किसने कितने लोगों को बड़े-बड़े उपहार दिए? सोशल मीडिया पर किसकी दीपावली सबसे शानदार दिखाई दी?

इन सबके बीच कभी-कभी त्योहार मनाने का असली उद्देश्य ही पीछे छूट जाता है।

खुशी मनाने के लिए अपनी आर्थिक क्षमता से अधिक खर्च करना, केवल दूसरों की बराबरी करने के लिए कर्ज लेना या जरूरत से ज्यादा खरीदारी करना समझदारी नहीं है।

हर परिवार की अपनी आर्थिक स्थिति होती है। हमें उसी के अनुसार त्योहार मनाना चाहिए। घर को सजाना अच्छा है, बच्चों के लिए कपड़े खरीदना अच्छा है और अपनों को उपहार देना भी अच्छी बात है, लेकिन यह सब अपनी सामर्थ्य के भीतर होना चाहिए।

दीपावली की खुशी महंगे सामान से नहीं, बल्कि परिवार के साथ बिताए गए समय, आपसी प्रेम और मन की संतुष्टि से आती है।

इस बार कोशिश करें कि अनावश्यक खर्च बचाकर उसका कुछ हिस्सा किसी जरूरतमंद परिवार की मदद में लगाया जाए।

स्वच्छ घर के साथ स्वच्छ वातावरण भी हमारी जिम्मेदारी

दीपावली से पहले लगभग हर घर में सफाई होती है। लोग अपने घरों के कोने-कोने को साफ करते हैं, पुराने सामान को व्यवस्थित करते हैं और घर को सुंदर बनाने में जुट जाते हैं।

लेकिन क्या स्वच्छता की हमारी जिम्मेदारी केवल अपने घर तक ही है?

त्योहार के बाद अक्सर सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा दिखाई देता है। मिठाइयों के डिब्बे, प्लास्टिक, सजावट का सामान और पटाखों के अवशेष इधर-उधर पड़े रहते हैं।

हमें अपने घर की तरह ही अपने मोहल्ले और आसपास के वातावरण की भी चिंता करनी चाहिए।

जहाँ तक संभव हो, प्लास्टिक का उपयोग कम करें। पूजा और सजावट के बाद निकलने वाले कचरे को उचित स्थान पर डालें। सड़कों और सार्वजनिक स्थानों को गंदा न करें।

बच्चों को भी समझाएँ कि स्वच्छता केवल किसी एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की आदत होनी चाहिए।

हम दीपावली पर अपने घर में लक्ष्मी जी के स्वागत की तैयारी करते हैं, तो अपने आसपास को स्वच्छ रखना भी हमारी जिम्मेदारी है।

मिलावटखोरों के लालच से लोगों की सेहत से खिलवाड़ न हो

दीपावली पर मिठाइयों और पकवानों का अपना अलग महत्व है। परिवार और रिश्तेदार एक-दूसरे को मिठाई देते हैं। घर में तरह-तरह के पकवान बनते हैं और हर तरफ मिठास का माहौल रहता है।

लेकिन त्योहारों के समय खाद्य पदार्थों में मिलावट की आशंका भी बढ़ जाती है।

कुछ लोग अधिक मुनाफा कमाने के लालच में दूध, मावा, घी और मिठाइयों की गुणवत्ता से समझौता करते हैं। यह केवल व्यापार में बेईमानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ है जो विश्वास के साथ ये चीजें खरीदते हैं।

ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। खाद्य सुरक्षा विभाग को त्योहारों के दौरान नियमित जाँच करनी चाहिए और मिलावट पाए जाने पर कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

दुकानदारों को भी समझना होगा कि कुछ अतिरिक्त पैसे कमाने के लालच में किसी के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाना कितना गलत है।

वहीं, हमें भी विश्वसनीय दुकानों से ही मिठाइयाँ और खाद्य पदार्थ खरीदने चाहिए।

त्योहार की मिठास दूसरों की सेहत की कीमत पर नहीं होनी चाहिए।

खतरनाक पटाखों से दूरी रखें, खुशियों को परेशानी का कारण न बनाएँ

दीपावली पर दीप जलाना, घर सजाना और परिवार के साथ उत्सव मनाना हमारी सुंदर परंपरा है। लेकिन तेज आवाज और खतरनाक पटाखों के कारण कई लोगों को परेशानी होती है।

बुजुर्गों, छोटे बच्चों, बीमार लोगों और पशु-पक्षियों पर तेज आवाज और धुएँ का असर पड़ता है। कई बार असावधानी के कारण दुर्घटनाएँ भी हो जाती हैं।

दीपावली के आसपास हवा की गुणवत्ता पर भी प्रदूषण का प्रभाव पड़ सकता है।

इसलिए हमें अपनी खुशी के साथ दूसरों की परेशानी का भी ध्यान रखना चाहिए। खतरनाक पटाखों और तेज आवाज वाली आतिशबाजी से दूरी बनाएँ। बच्चों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करें और जहाँ आतिशबाजी की अनुमति हो, वहाँ नियमों का पालन करें।

क्या यह जरूरी है कि दीपावली की खुशी मनाने के लिए शोर और धुआँ ही हो?

दीयों की रोशनी, रंगोली, परिवार के साथ पूजा और अपनों के बीच हँसी-खुशी भी दीपावली को यादगार बना सकती है।

धनतेरस: धन के साथ स्वास्थ्य और समृद्धि का भी महत्व समझें

आज 6 नवंबर 2026 को धनतेरस का पर्व है। इस दिन बाजारों में विशेष रौनक दिखाई देती है। लोग अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार सोना, चाँदी, बर्तन और अन्य उपयोगी वस्तुएँ खरीदते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस का संबंध भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर से है। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है।

इस पर्व का एक संदेश यह भी है कि जीवन में धन जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी अच्छा स्वास्थ्य भी है।

हम अक्सर अधिक धन कमाने और संपत्ति जुटाने की चिंता में लगे रहते हैं, लेकिन अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य को उतना समय नहीं दे पाते।

धनतेरस हमें याद दिलाती है कि सुखी जीवन के लिए धन, स्वास्थ्य, परिवार और मन की शांति सभी का अपना महत्व है।

इस दिन अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर का पूजन करें। शाम को दीप प्रज्वलित करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

खरीदारी अवश्य करें, लेकिन दिखावे के लिए नहीं, अपनी आवश्यकता और सामर्थ्य के अनुसार।

दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन: श्रद्धा और विश्वास का पर्व

दीपावली की शाम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा घरों में होने वाली लक्ष्मी-गणेश पूजा है।

माता लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी माना जाता है तथा भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों का आरंभ करने वाला देवता माना जाता है।

इस दिन लोग अपने घरों की सफाई करते हैं, पूजा स्थल सजाते हैं और परिवार के साथ बैठकर विधि-विधान से पूजा करते हैं।

सामान्य रूप से लक्ष्मी-गणेश पूजन की तैयारी और विधि इस प्रकार है:

1. घर और पूजा स्थल की सफाई: पूजा से पहले घर और पूजा स्थान को साफ करें। रंगोली बनाएँ और पूजा की आवश्यक सामग्री तैयार रखें।

2. प्रतिमा की स्थापना: स्वच्छ चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

3. संकल्प और पूजन: परिवार के साथ बैठकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करें। भगवान गणेश और माता लक्ष्मी को तिलक, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।

4. भोग और प्रसाद: फल, मिठाई और अन्य सात्विक प्रसाद अर्पित करें।

5. मंत्र और आरती: श्रद्धापूर्वक भगवान गणेश और माता लक्ष्मी का स्मरण करें। परिवार के सभी सदस्य मिलकर आरती करें।

6. दीप प्रज्वलन: घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल और उचित स्थानों पर मिट्टी के दीपक जलाएँ।

पूजा की विधि और शुभ मुहूर्त के लिए अपने स्थानीय पंचांग तथा परिवार की परंपरा का पालन करें।

गणेश वंदना

दिल्ली में 8 नवंबर 2026 को लक्ष्मी पूजन का प्रचलित शुभ मुहूर्त शाम 5:54 से 7:50 बजे तक बताया गया है। अन्य शहरों में समय अलग हो सकता है।

पूजा में सबसे महत्वपूर्ण बात मन की श्रद्धा और परिवार की एकजुटता है।

इस दीपावली अपने माता-पिता और बुजुर्गों को भी दें खुशियों का उपहार

आज के व्यस्त जीवन में हम अपने काम, व्यापार और जिम्मेदारियों में इतने उलझ जाते हैं कि कभी-कभी अपने ही परिवार के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है।

माता-पिता दिनभर हमारा इंतजार करते हैं। घर के बुजुर्ग चाहते हैं कि परिवार के लोग उनके पास बैठें, उनसे बातचीत करें और उनकी बातें सुनें।

लेकिन कई बार त्योहार पर भी हम अपने मोबाइल, सोशल मीडिया और दूसरी व्यस्तताओं में उलझे रहते हैं।

दीपावली का अवसर हमें यह सोचने का मौका देता है कि आखिर हमारे जीवन की सबसे बड़ी पूँजी क्या है?

क्या केवल पैसा, घर, गाड़ी और संपत्ति ही हमारी सफलता है? या फिर हमारे माता-पिता का आशीर्वाद, परिवार का साथ और अपनों का प्रेम भी उतना ही महत्वपूर्ण है?

इस दीपावली अपने माता-पिता के पास बैठें। उनके साथ समय बिताएँ। यदि वे आपसे दूर रहते हैं तो उनसे मिलने का प्रयास करें। उनके स्वास्थ्य और जरूरतों का ध्यान रखें।

घर के बुजुर्गों को त्योहार की तैयारियों और खुशियों में शामिल करें। बच्चों को भी अपने दादा-दादी और नाना-नानी के साथ समय बिताने के लिए प्रेरित करें।

कभी-कभी माता-पिता को किसी महंगे उपहार की जरूरत नहीं होती। उनके लिए हमारे पास बैठकर कुछ देर बात करना ही सबसे बड़ा उपहार होता है।

रिश्तों में प्रेम और अच्छे व्यवहार को बनाएं दीपावली की पहचान

त्योहारों का असली आनंद तभी है जब परिवार और समाज में आपसी प्रेम बना रहे।

हमारे आसपास कई ऐसे रिश्ते होते हैं जिनमें छोटी-छोटी गलतफहमियों के कारण दूरियाँ आ जाती हैं। कभी किसी की बात बुरी लग जाती है, कभी अहंकार बीच में आ जाता है और कभी हम अपनी गलती स्वीकार करने में भी संकोच करते हैं।

दीपावली ऐसा अवसर है जब हम इन दूरियों को कम करने की पहल कर सकते हैं।

किसी नाराज रिश्तेदार को फोन कर लें। किसी पुराने मित्र से बात कर लें। पड़ोसियों को शुभकामनाएँ दें और जिन लोगों से हमारा रोज का मिलना-जुलना है, उनके साथ अच्छा व्यवहार करें।

हमें यह भी याद रखना चाहिए कि त्योहार पर केवल अपने परिवार की खुशियों के बारे में सोचना पर्याप्त नहीं है। हमारे आसपास रहने वाले जरूरतमंद, अकेले और बुजुर्ग लोगों को भी हमारे प्रेम और सहयोग की जरूरत हो सकती है।

अच्छा व्यवहार किसी एक त्योहार तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह हमारे स्वभाव और जीवन का हिस्सा होना चाहिए।

आइए, इस दीपावली कुछ छोटे लेकिन जरूरी संकल्प लें

बड़ी-बड़ी बातें करने के बजाय यदि हम अपनी जिंदगी में कुछ छोटी आदतें बदल लें, तो समाज में भी सकारात्मक बदलाव आ सकता है।

इस दीपावली हम संकल्प लें कि:

  • मिट्टी के दीये खरीदकर स्थानीय कुम्हारों और कारीगरों की मदद करेंगे।

  • गरीब और जरूरतमंद परिवारों के साथ अपनी सामर्थ्य के अनुसार खुशियाँ बाँटेंगे।

  • अनावश्यक खर्च और दिखावे से बचेंगे।

  • घर के साथ आसपास की स्वच्छता का भी ध्यान रखेंगे।

  • मिलावट करने वालों के खिलाफ आवाज उठाएँगे और जिम्मेदार उपभोक्ता बनेंगे।

  • खतरनाक पटाखों से दूरी रखेंगे और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखेंगे।

  • माता-पिता और बुजुर्गों को समय देंगे तथा उन्हें त्योहार में शामिल करेंगे।

  • रिश्तों में प्रेम, सम्मान और अच्छे व्यवहार को प्राथमिकता देंगे।

अंत में... दीपावली की रोशनी किसी एक घर तक सीमित न रहे

हम हर साल दीपावली मनाते हैं। घर सजाते हैं, दीये जलाते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं और अपनों के साथ खुशियाँ मनाते हैं। यह सब हमारी परंपरा और जीवन का सुंदर हिस्सा है।

लेकिन इस बार एक बार अपने आसपास भी नजर डालिए।

हो सकता है कि आपके घर के पास बैठा कोई कुम्हार इस उम्मीद में हो कि आज उसके कुछ और दीये बिक जाएँगे। हो सकता है कि कोई गरीब दुकानदार अपने बच्चों के लिए मिठाई खरीदने के पैसे जुटाने की कोशिश कर रहा हो। हो सकता है कि आपके ही परिवार का कोई बुजुर्ग आपके साथ कुछ पल बिताने का इंतजार कर रहा हो।

यदि हम अपनी छोटी-छोटी कोशिशों से इन लोगों की दीपावली थोड़ी बेहतर बना सकें, तो इससे बड़ी खुशी और क्या होगी?

दीपावली केवल अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर की उदासीनता, लालच, अहंकार और कटुता को दूर करने का अवसर भी है।

इसलिए इस बार सिर्फ अपने घर में दीये न जलाएँ, बल्कि अपने व्यवहार से भी दूसरों के जीवन में रोशनी लाने का प्रयास करें।

मानवता का दीप जलायें

क्योंकि असली दीपावली वह नहीं, जिसमें केवल हमारा घर जगमगाए; असली दीपावली तो वह है, जिसमें हमारी वजह से किसी दूसरे के घर में भी खुशियाँ आएँ।

आप सभी को धनतेरस और दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

शुभ दीपावली!

— bhagwanbabu.com

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