कर के मंज़ूर मेरी शर्त वो आया होगा
पढ़िए मोहब्बत, इंतज़ार, तन्हाई और टूटते रिश्तों के एहसासों से सजी हिंदी ग़ज़ल “कर के मंज़ूर मेरी शर्त वो आया होगा”, साथ में इसका अंग्रेज़ी अनुवाद।
पढ़िए मोहब्बत, इंतज़ार, तन्हाई और टूटते रिश्तों के एहसासों से सजी हिंदी ग़ज़ल “कर के मंज़ूर मेरी शर्त वो आया होगा”, साथ में इसका अंग्रेज़ी अनुवाद।
चराग़ को हवा न दे—दर्द, ख़ामोशी, टूटे एहसास और भीतर की आग को बयां करती एक भावपूर्ण हिंदी ग़ज़ल। पढ़ें और इन अल्फ़ाज़ में छिपे एहसासों को महसूस करें।
एक लफ़्ज है जो बंदे को ज़ालिम बना देता है एक लफ़्ज है जो बंदे को सोहबत करा देता है एक रंग है जो जीवन को रंगीन बना देता है एक रंग है जो मन को ग़मगीन करा देता है
ज़ख्मों को मैं रोज जलाता रहता हूँ घर को अपने रोशन करता रहता हूँ है खबर कहाँ अतफालों को इन बातों की हर रोज ख्वाहिशे उनकी ढोता रहता हूँ
जय गणेश बोलो जय गणेश -2 जय गणेश गणपति गजानन बल-बुद्धि है तुम्हरे कारण मस्तक मणि मुकुट अति शोभे कर अंकुश वर वेद विराजे ॥ जय गणेश बोलो...
कोई बात पुरानी न कीजिए सैकड़ों ज़ख्म है इन्हें हवा न दीजिए जिगर से कीमती है ये ज़ख्म मेरे मेरा मुझसे फिर जुदा न कीजिए रहम नहीं एक सितम और चाहिए
धूल दर्पण से कभी हटा कर देखो नक़ाब चेहरे से कभी हटा कर देखो सूखे तिनकों के घोसलें में भी बनते है रिश्तें अपने रिश्तों को कभी निभा कर देखो
दीया है एक जलाना कोरोना है कोरोना है शैतान है ये ज़ालिम छोटा है ये बहुत पर आँख है दिखा रहा अपने घिनौने कृत्य से इंसान को डरा रहा अंधकार की तरह
कोरोना आपदा अपने तीसरे और निर्णायक चरण में पहुँच गया है तो पीएम मोदी जी द्वारा आखिरी विकल्प के रुप में पूरे भारत में 21 दिनों का सम्पूर्ण लॉकडाउन किया गया है ।
मुझसे मेरे दर्द की इंतेहा, न पूछिए, किस-किसने दिए है ज़ख्म, न पूछिए। mujhse mere dard ki inteha n puchhiye, kis-kisne diye hai zakhm n puchhiye.
मानवता का दीप जले फिर ऐसा ही कुछ काम कर चले जग मे फैल रहा अन्धियारा भाईयों मे हो रहा बँटवारा आओ प्रीत यहाँ फैलाये जाति धर्म भले मिट जाये
जब कोई छोड़ जाते है अपनी ही बसाई दुनिया को और फिर अपने ही लोगो द्वारा पहुँचाए जाते है श्मशान मे तो सच पूछिये... तो खुदा की दी गयी दुनिया की तमाम बख़शीशो