काव्य

ढूँढता हूँ खुद को मैं यहाँ-वहाँ

ढूँढता हूँ खुद को मैं यहाँ-वहाँ

ढूँढता हूँ खुद को मैंं यहाँ-वहाँ 

ढूँढता हूँ खुद को मैं यहाँ-वहाँ
बिखर गया हूँ टूटकर जहाँ-तहाँ

चोट की है दिल पे उसने दोस्तों
बदन पे ज़ख्म है मगर जहाँ-तहाँ

किलकारियाँ थी जहाँ अतफ़ाल की
फैला है बेग़ुनाह सर जहाँ-तहाँ

राज है अब हर तरफ ज़ल्लाद का
आदमो ने की बसर जहाँ-तहाँ

मेरे मज़हबी जो नही काफिर है वो
शैतान ने ये दी ख़बर जहाँ-तहाँ

होश में आए है जब से बे-ज़बां
दिख रहा है कुछ असर जहाँ-तहाँ

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Bhagwan Babu · भगवान बाबु

Hindi poetry, ghazals, songs and essays, along with technology tutorials. Writing published in Dainik Jagran.

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